Tuesday, November 2, 2010

मेरी सबसे बड़ी भूल

अक्सर वो मेरे जज्बातों से खेलते है,
सायद ये उनका पसंदीदा खेल है,
जूनून की हदें पार कर चाहते है उसको,
लगता है यही मेरी सबसे बड़ी भूल है |

Thursday, October 21, 2010

जब हमे दर्द हुआ

हमने उनको गले लगा कर,
उनके दर्द को अपना बना लिया,
जब हमे दर्द हुआ,
हम बाहें फेलाए खड़े रहे,
और उन्होंने ख़त्म हो गया जज्बात कह दिया|

Wednesday, October 13, 2010

तेरे दामन की आदत जो हो गई है

बरसो से तुझे देखा नहीं,
जाने केशी है तू,
क्यूँ मेरे दिल को चैन आता नहीं ,
हर लम्हा तुझे ही ढूंढता हूँ ,
पता नहीं किस
हाल में है तू ,
मिलने को बेक़रार ये दिल ,
हर वक़्त यही पूछे जानेमन कहाँ है तू ,
मेरा तुझ से अजीब सा रिश्ता है ,
ज़िन्दगी भर का और एक विश्वास का ,
डरता हूँ कहीं दामन ना छुड़ा ले तू ,
अब अकेले चलने में भी डर लगता है ,
तेरे दामन की आदत जो हो गई है ,
बरसो से तुझे देखा नहीं,
जाने केशी है तू |

Wednesday, September 8, 2010

तेरी जिद मेरी चाहत

आज उनकी नजरो में,
हम उनके लायक नहीं रहे,
सायद कभी किसी की ज़िन्दगी थे,
आज उसी के लिये मर गये |

हमारी चाहतो को मार कर,
उन्होंने अपनी ज़िद पूरी की,
जिद्दी तो हम भी थे पर,
उनकी जिद के आगे हार गये|

दफ़न कर दी हमने अपनी चाहतो को,
अपने सिने के कब्र में,
अब खुद की चाहत खुद तक रखता हूँ,
देखते है कब हारेगी ,

तुम्हारी ज़िद मेरी चाहत के आगे|

Wednesday, September 1, 2010

बड़े बेआबरू होकर निकाले गये तेरे दर से

बड़े बेआबरू होकर निकाले गये तेरे दर से ,
अब तो दर दर भटकना ही लिखा है ,
वक़्त वे वक़्त आँखे भर आती है ,
अब तो यादो के सहारे ही जीना है |
फुर्सत तो हमे भी थी मोहाब्बत करने की,
बस वक़्त ने साथ छोर दिया ,
हालात से इतने मजबूर हो गये,
की अब हिम्मत ने भी जवाब दे दिया |

Wednesday, December 16, 2009

मेरी सजा




सिकायत करूँ किससे तेरी बेबफाई का ,
जब तक़दीर ही बेबफा है ,
रुसबाइयां तो मेरे नसीब में थी ,
बस तकलीफ ही मेरी सजा है |

गुस्ताख ये दिल मेरा जिसकी दिल्लगी का ,
गुल ये सुहाना खिला है ,
काँटों भरी ज़िन्दगी मिली मुझको ,
बस तन्हाईयाँ ही मेरी सजा है |

विरानो से पूछता हूँ पता उसका ,
हर तरफ सन्नाटा नज़र आता है ,
आँखे थक गई रहो में अब ,
बस इंतजार ही मेरी सजा है |

बता दे राज कोई उस नींद का ,
जो महबूबा का दीदार करता है ,
मै डूबा करता था उसकी यादो में ,
बस अब ख़वाब ही मेरी सजा है |

ये खेल था दिल तोड़ने का ,
और बाज़ी भी आपने ही जीता है ,
किस्मत भी मुह मोर गई अब तो ,
बस उम्मीद ही मेरी सजा है |

बहाना ढूंढ़ लिया जीने का ,
ये दीवाना अब गजल लिखता है ,
हर लम्हा कागज पर उतारूँ ,
बस कलम ही मेरी सजा है |

Friday, December 11, 2009

ज़िन्दगी की हर राह मुस्किल होती है



ज़िन्दगी की हर राह मुस्किल होती है ,
अक्सर अकेला ही चलना पड़ता है | 
मुसाफिर बहुत मिल जायेंगे रहो में ,
पर साया ही ख़ुद के साथ चलता है |
मुमकिन नही हर किसी को मंजिल मिले ,
वही मंजिल पर पहुँचता है ,
जिसपर किस्मत का साथ होता है | 
कब कौन कहाँ किसका साथ छोर दे ,
इसका अंदाजा हमें कहाँ होता है | 
कुछ पल की खुसी जज्बात बहा ले जाते है ,
वरना वही गम साथ होता है |
दुसरो पर उमीद क्यों रखना ,
ख़ुद पर यकीं रखना होता है | 
क्योकि इस गुमनाम शहर में ,
ख़ुद की परछाई ही हमसफ़र होता है |